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शिक्षा और परिवर्तन की राह, पार्वती की कहानी

यह कहानी मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पोहरी विकासखंड के छोटे से गांव जटवारा की है। यह गांव सहरिया आदिवासी समुदाय का एक बस्ती-प्रधान क्षेत्र है जहां आजीविका के सीमित साधन, शिक्षा की कमी, और जल संकट जैसी चुनौतियां आम समस्‍याएं हैं। इन्हीं परिस्थितियों में पली-बढ़ी पार्वती आदिवासी आज अपने गांव की एक जानी-मानी स्वयंसेवी और प्रेरणास्रोत हैं। वह ‘समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन परियोजना’ के अंतर्गत विकास संवाद समिति के साथ कार्यरत हैं और अपने गांव में शिक्षा, पोषण, स्वच्छता और अधिकारों के लिए सामुदायिक नेतृत्व की मिसाल बन चुकी हैं।

प्रेरणा और शुरुआत

पार्वती ने परिवर्तन की पहल तब शुरू की जब उसने देखा कि गांव के अधिकांश बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। सुबह के बच्चे मैदानों में खेलते रहते थे। कई माता-पिता सोचते थे कि बेटे बड़े होकर वैसे भी मजदूरी ही करेंगे। स्कूल जाने से क्या लाभ होगा। समुदाय की इस सोच ने पार्वती को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि अगर शिक्षा के अभाव का यह चक्र नहीं टूटा तो समुदाय कभी भी गरीबी और निर्भरता से मुक्त नहीं हो पाएगा।

उन्होंने सबसे पहले अपने ही घर से शुरुआत की। अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजना शुरू किया और फिर पड़ोसी परिवारों से संवाद किया। धीरे-धीरे उन्होंने गांव में बैठकों का आयोजन किया, माताओं के साथ समूह में चर्चा की और उन्हें समझाया कि शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं है बल्कि भविष्य की सुरक्षा है।

समस्‍या से समाधान तक

पार्वती की राह आसान नहीं थी। कई बार माता-पिता ने कहा कि बच्चे स्कूल में क्या सीखेंगे? हमें तो खेतों में और मजदूरी करने में मदद चाहिए।

इस सोच के आगे पार्वती ने हार नहीं मानी। उसने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षक के साथ मिलकर बच्चों की उपस्थिति पर निगरानी रखी। जो बच्चे अनुपस्थित रहते थे, वे उनके घर जाकर कारण समझतीं तथा समस्‍याओं का समाधान करती। कुछ परिवारों को यह भी डर था कि स्कूल में पानी या साफ-सफाई न होने के कारण बच्चे बीमार पड़ेंगे।

पार्वती ने इस मुद्दे को भी गंभीरता से लिया। उसने जल जीवन मिशन की ग्राम समिति से संपर्क किया। विकास संवाद टीम से मिल कर आवेदन तैयार करवाया और पंचायत को कई बार पत्र लिखे। महीनों की मेहनत के बाद गांव में पानी की टंकी स्थापित हुई। इससे न केवल स्कूल बल्कि आसपास के घरों को भी स्वच्छ पेयजल मिलने लगा।

परिणाम और परिवर्तन की झलक

आज जटवारा गांव का माहौल पहले की तुलना में बिल्कुल अलग है। पार्वती के लगातार प्रयासों ने न केवल बच्चों की शिक्षा में नई जान फूंकी बल्कि पूरे समुदाय की सोच और भागीदारी को भी बदल दिया। पहले जहां बच्चे अनियमित रूप से स्कूल जाते थे, अब लगभग 90 प्रतिशत बच्चे नियमित रूप से स्कूल पहुंचते हैं। शिक्षा के प्रति समुदाय का नजरिया भी बदला है। जो माता-पिता पहले कहते थे कि पढ़ाई से क्या होगा, वे अब अपने बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ने जाते हैं। कभी बच्चों की उपस्थिति में बाधा बनने वाली स्कूल की पानी गंभीर समस्या भी अब खत्म हो गई है। जल जीवन मिशन के तहत टंकी लगने से स्कूल और गांव दोनों में नियमित पानी की सुविधा उपलब्ध है। महिलाओं की सामुदायिक बैठकों में भागीदारी भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। अब निर्णय प्रक्रियाओं में महिलाओं की आवाज सुनी जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्वती अब सिर्फ एक स्वयंसेवक नहीं, बल्कि गांव के नेतृत्व और परिवर्तन का प्रतीक बन चुकी हैं। उनकी पहचान अब हर परिवार के सम्मान और प्रेरणा से जुड़ गई है।

सामुदायिक प्रभाव

अब जटवारा गांव में शिक्षा और स्वच्छता पर सामूहिक चर्चा होना सामान्य बात है। माताएं अपने बच्चों को पढ़ाने में रुचि लेती हैं। कई परिवारों ने बच्चों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म और कॉपी-पेंसिल खरीदने शुरू किए हैं।

गांव के शिक्षक का कहना है, “पार्वती की वजह से हमारे स्कूल में बच्चे नियमित आते हैं। पहले स्कूल खाली रहता था, अब हर दिन चहल-पहल रहती है।”

इस योगदान के लिए पंचायत स्तर पर पार्वती का सम्मान किया गया। अन्य गांवों की महिला बैठकों में उसे अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

पार्वती की कहानी यह साबित करती है कि विकास की असली शुरुआत समुदाय के भीतर से होती है। उन्होंने सिद्ध किया है कि यदि एक महिला दृढ़ निश्चय और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़े तो गांव के बच्चों का भविष्य और समाज की सोच— दोनों बदले जा सकते हैं। पार्वती केवल एक स्वयंसेवी नहीं हैं बल्कि वह उस नई सोच की प्रतीक हैं जहां एक महिला, एक मां और एक नागरिक अपने गांव को बेहतर दिशा देने की क्षमता रखती है।

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Vikas Samvad is a research, documentation and capacity building organisation for building a team of socially sensitive cadre, communicators and organised groups with a child centric perspective.

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