समुदाय के सहयोग से शाला को बेहतर बनाने की पहल
विकास संवाद समिति द्वारा शाहाबाद में शाला प्रबंधन समिति एवं ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति के सदस्यों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में स्कूल में बच्चों की नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता पर विशेष चर्चा हुई तथा स्कूल के वातावरण को बेहतर बनाने में एसएमसी की भूमिका, कार्य और जिम्मेदारियों पर विस्तार से बात की गई। इसके साथ ही ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियों के कानूनी प्रावधानों, भूमिका, कार्य और जिम्मेदारियों पर भी विस्तृत बातचीत की गई तथा बाल श्रम और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन पर विशेष फोकस रखा गया।
कार्यशाला में 20 गांवों के कुल 40 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें शाला प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्य, ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति (वीएलसीपीसी) के सदस्य, ग्राम पंचायत के पंच सरपंच और समुदाय के सदस्य शामिल रहे। महिलाओं और बच्चों में पोषण स्तर सुधारने के लिए स्थानीय खाद्य सामग्री, सरकारी योजनाओं (जैसे आंगनवाड़ी, स्कूल मिड डे मील, स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं) आदि के बेहतर उपयोग और सामुदायिक निगरानी पर भी चर्चा की गई। पेयजल, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े स्थानीय मुद्दों को भी ग्राम पंचायत विकास योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए उनके समाधान के लिए सुझाव तैयार किए गए।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को ग्राम पंचायत विकास योजना की अवधारणा, उसकी प्रक्रिया, विभिन्न समितियों की भूमिका और समुदाय आधारित योजना निर्माण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों के साथ संवाद के माध्यम से यह समझ विकसित की गई कि गांव की समस्याओं को कैसे सूचीबद्ध किया जाए, प्राथमिकताएं तय की जाएं और उन्हें ग्राम पंचायत विकास योजना में दर्ज कर कार्ययोजना के रूप में शामिल किया जाए। कार्यशाला के तीसरे दिन सभी प्रतिभागियों ने फरेदुआ तलहटी ग्राम में समुदाय के साथ मिलकर ग्राम विकास योजना बनाने का व्यावहारिक अभ्यास किया। गांव की चौपाल पर ग्रामीणों और प्रतिभागियों ने मिलकर गांव का ‘नजरी नक्शा’ (विलेज मैपिंग) तैयार किया, जिसके माध्यम से गांव की भौगोलिक स्थिति, बस्तियों, विद्यालय, पेयजल स्रोत, आंगनवाड़ी, सड़क, नालियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को चिन्हित किया गया।
कार्यशाला के संचालन में विकास संवाद समिति के राजेश भदौरिया, जिला कार्यक्रम समन्वयक श्वेता गुप्ता और रविकांत भार्गव ने प्रशिक्षक के रूप में भूमिका निभाई। इस दौरान शगुफ्ता खान, पूनम खंगार, रामचंद्र माली और योगेश भार्गव भी उपस्थित रहे और उन्होंने सत्र संचालन, समूह कार्य तथा फील्ड अभ्यास में सक्रिय सहयोग दिया।
समापन सत्र में प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे अपने अपने गांवों की ग्राम पंचायत विकास योजना में बच्चों से जुड़े मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, बाल संरक्षण, बाल श्रम और बाल विवाह रोकथाम आदि को प्राथमिकता से शामिल करवाने और गांव के सर्वांगीण विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में ठोस प्रयास करेंगे।
उल्लेखनीय है कि विकास संवाद समिति द्वारा चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) के सहयोग से “बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा एवं जीवन कौशल विकास कार्यक्रम” संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से समुदायों में जागरूकता, सहभागिता और बच्चों के अधिकारों की समझ को मजबूत करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
