सामाजिक नागरिक संस्थाओं में संचार प्रबंधन
सामाजिक नागरिक संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का योगदान इतिहास में तो दर्ज है ही, लेकिन समाज उसे विशेष पहचान नहीं देता है। अज भी सामाजिक बदलाव और रचनात्मक विकास में संस्थाओं की ऐसी भूमिका है, जिसके बिना शासन व्यवस्था, समाज और बाज़ार के बीच के खाली स्थान को ‘अभाव और विसंगति’ बनने से रोका नहीं जा सकता है। यह समय है जब सामाजिक नागरिक संस्थाओं को अपने सपने और अपने काम की महत्ता के बारे में लगातार संवाद करना चाहिए। यह ध्यान रखना जरूरी है कि लोग संस्थाओं से नहीं, संस्थाओं के सपने और विचार से जुड़ते हैं। यह प्रवेशिका सामाजिक नागरिक संस्थाओं के प्रबंधन में शामिल लोगों और उनमें काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए बनाई गई है। इस प्रवेशिका का मकसद सामाजिक नागरिक संस्थाओं के विचार, योजना और काम में रणनीतिक संचार को यथोचित स्थान ड़ालना है। इस प्रवेशिका से उन्हें सामाजिक नागरिक संस्थाओं की संरचना और भूमिका में संचार और संवाद के महत्व को पहचानने में मदद मिलेगी।
यह किताब पहला चरण है। दूसरा चरण है आपका पहल के लिए तैयार होना और अपने स्तर पर अपने लिए योजना बनाना। तीसरा चरण है एक दूसरे का साथ-सहयोग लेना। अगर हम इस किताब को व्यावहारिक रूप में लागू करने की आपकी योजना में सहभागी हो सकते हैं, तो हमें बताइएगा।
इस प्रवेशिका को पढ़कर और अभ्यास में लाकर सामाजिक नागरिक संस्थाओं से सम्बद्ध व्यक्ति:
- इस वक्तव्य, “सामाजिक नागरिक संस्थाओं के सन्दर्भ में रणनीतिक संचार का मतलब है कि ये संस्थाएं अपनी अभिव्यक्ति, वक्तव्य और प्रस्तुति में (यानी संचार की प्रक्रिया में) अपने उस सपने के बारे में बात करें, जो उन्होंने एक बेहतर समाज के लिए देखा है” को सुस्पष्ट कर सकेंगे।
- अपनी संस्था की बेहतर छवि स्थापित कर सकने के लिए सभी मुख्य हितधारकों की धारणाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावी संचार और प्रक्रियाएं अपना सकने के लिए प्रेरित होंगे।
